| डॉ। संजय गुप्ता, अध्यक्ष होम्योपैथी सेवा समिति, बांसवाड़ा, राजस्थान |
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कोरोना को लेकर पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है। हर ओर जीवन रक्षक दवाओं को लेकर संकट बना हुआ है। ऐसे में होम्योपैथिक चिकित्सकों ने ऑक्सीजन बढ़ाने वाली दवाओं का देश के अलग-अलग राज्यों में मरीजों में शोध किया गया। इस दौरान पाया गया कि मरीजों में ऑक्सीजन बढ़ाने वाली दवाएं कारगर हैं और इनका इस्तेमाल मरीज कर सकते हैं।
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राजस्थान के बांसवाड़ा में होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ संजय गुप्ता बताते हैं कि कोरोना के मरीजों में एलोपैथिक दवाओं के साथ-साथ होम्योपैथी की दवायें भी असरदार हैं। डॉक्टर गुप्ता कहते हैं, उन्होंने अपने इलाके में मरीजों को ऑक्सीजन बढ़ाने वाली दो दवाओं को देकर 15-15 दिनों के अंतराल पर चेक किया और पाया कि उनका ऑक्सीजन लेवल बढ़ा है। डॉ. गुप्ता के मुताबिक होम्योपैथ में ऐसी दवाओं का एविडेंस बेस्ड रिसर्च क्लीनिकल अध्ययन है। इस रिसर्च के आधार पर ही मरीजों को ऑक्सीजन बढ़ाने वाली दवाएं दी जा रही हैं। ये दवाएं मरीजों के लिए रामबाण हैं।
डॉक्टर संजय गुप्ता के मुताबिक ऑक्सीजन बढ़ाने वाली दो दवाएं, जिसमें "वैनेडियम मेट" और "एस्पीडोस्पर्मा क्युब्रायो" जैसी महत्वपूर्ण दवाएं शामिल है। डॉक्टर संजय गुप्ता के मुताबिक कम ऑक्सीजन स्तर वाले मरीजों को दोनों दवाओं की दस दस बूंदें दिन में तीन बार 15 दिनों तक लेनी है। डॉ गुप्ता ने राजस्थान के बांसवाड़ा समेत आसपास के कई राज्यों और जिलों के मरीजों को इन दवाओं को देकर देखा और पाया कि मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ा है।
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इसके अलावा डॉ गुप्ता के मुताबिक कुछ और भी दवाएं हैं जिनका इस्तेमाल करके मरीजों को कोरोना जैसी बीमारी से लड़ने में मदद मिलती है। ये दवाएं ब्रायोनिया "अल्बा 30", "चाइना 30" और "युप्टोरियम 30" दवाओं की पांच-पांच बूंदे एक कप में मिलाकर दिन में तीन बार 15 दिनों तक लेनी चाहिए। होम्योपैथिक चिकित्सक सेवा समिति के मुताबिक यह दवाएं करोना वायरस से लड़ने में कारगर हैं।
होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ संजय गुप्ता कहते हैं कि कोरोना से सावधान रहने की जरूरत है लेकिन इससे डरने की आवश्यकता कतई नहीं है। वे कहते हैं कि इस बुखार को एकदम सामान्य तरीके से लेना चाहिए क्योंकि इसका वक्त रहते इलाज संभव है। डॉ गुप्ता के मुताबिक होम्योपैथिक चिकित्सा में ऐसी बहुत सी दवाएं रिसर्च के आधार पर तय की गई हैं जो मरीजों को गंभीर से गंभीर बीमारी में फायदा पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि कोविड में 90 फीसदी से ज्यादा लोगों को होम आइसोलेशन में रखकर ठीक किया जा सकता है। लोगों को इस बीमारी में जरा भी घबराने की जरूरत नहीं